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Tuesday, 18 December 2018

महादेवी वर्मा / जीवन परिचय


महादेवी वर्मा / जीवन परिचय 




जन्म स्थान – फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश )        जन्म एवं मृत्यु सन 1907 ई० – 1987 ई० l
पिता – गोविन्दप्रसाद वर्मा l                  माता – श्रीमती हेमरानी देवी l
भाषा – संस्कृतनिष्ठ खड़ीबोली l               शैली – विवेचनात्मक, संस्मरणात्मक, भावात्मक,                                                    व्यंग्यात्मक, चित्रात्मक, अलंकारिक l


जीवन परिचय महादेवी वर्मा ‘पीड़ा की गायिका’ के रूप में सुप्रसिद्ध छायावादी कवियित्री होने के साथ एक उत्कृष्ट लेखिका भी थी l गुलाबराय जैसे शीर्ष स्तरीय गद्यकार ने लिखा है –‘मैं गद्य में महादेवी का लोहा मानता हूँ l’ महादेवी वर्मा जी का जन्म फर्रुख्बाद के एक संपन्न कायस्थ परिवार में सन 1907 ई० में हुआ था l इंदौर में प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद इन्होने क्रास्थवेट गर्ल्स कालेज, इलाहाबाद में शिक्षा प्राप्त की l इंका विवाह स्वरुप नारायण वर्मा से ग्यारह वर्ष की अल्प आयु में ही हो गया था l श्वसुर जी के विरोध के कारण इनकी शिक्षा में व्यवधान आ गया, परन्तु उनके निधन के पश्चात् इन्होने पुनः अध्ययन आरंभ किया और प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय में एम० ए० की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की l वे 1965 ई० तक प्रयाग महिला विद्या पीठ की प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत रही l इन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद् की सदस्य भी मनोनीत किया गया l इनका देहावसान 11 सितम्बर, 1987 ई० को प्रयाग में हुआ l 

साहित्यिक परिचय महादेवी वर्मा के गद्य आरंभिक रूप इनकी काव्य कृतियों की भूमिकाओं में देखने को मिलता है l ये मुख्यतः कवियित्री ही थी, फिर भी गद्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कोटि के संस्मरण, रेखाचित्र, निबन्ध, एवं आलोचनाएँ लिखीं l रहस्यवाद एवं प्रकृतिवाद पर आधारित इनका साहित्य; हिंदी साहित्य की अमूल्य विरासत के रूप में स्वीकार किया जाता है l विरह की गायिका के रूप में महादेवी जी को ‘आधुनिक मीरा’ कहा जाता है l महादेवी जी के कुशल संपादन के परिणाम स्वरुप ही ‘चाँद’ पत्रिका नारी जगत की सर्वश्रेष्ठ पत्रिका बन सकी l इन्होने साहित्य के प्रचार प्रसार हेतु ‘साहित्यकार संसद’ नामक संस्था की स्थापना की l इन्हें ‘नीरजा’ काव्य रचना पर ‘सेकसरिया’ पुरस्कार और ‘यामा’ कविता संग्रह पर ‘मंगलाप्रसाद’ पारितोषिक से सम्मानित किया गया l कुमांऊ विश्वविद्यालय ने इन्हें डी० लिट० की मानक उपाधि से विभूषित किया l भारत सरकार से ‘पद्मविभूषण’ भी इन्हें प्राप्त हुआ था लेकिन हिंदी के प्रचार प्रसार के प्रति सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति से व्यथित होकर महादेवी जी ने इस अलंकरण को वापस कर दिया l ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्कार इन्हें 1983 में दिया गया था l 

रचनाएँ – महादेवी वर्मा की प्रमुख कृतियाँ अग्रलिखित हैं – 

निबन्ध – संग्रह – ‘अबला और सबला’, ‘साहित्यकार की आस्था’, ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’, ‘क्षणदा’ आदि l इन निबन्ध संग्रहों में इनके साहित्यिक तथा विचारात्मक निबन्ध संगृहित हैं l

संस्मरण और रेखाचित्र – ‘पथ के साथी’, ‘मेरा परिवार’, ‘स्मृति की रेखाएं’, ‘अतीत के चलचित्र’ आदि l इनमे इनके ममतामई ह्रदय के दर्शन होते हैं l इनमे गद्य चित्रात्मक, कवित्वपूर्ण एवं भावात्मक है l 

संपादन – ‘आधुनिक कवि’ नामक काव्य संग्रह और ‘चाँद’ पत्रिका का विद्वत्ता के साथ संपादन कार्य किया l

आलोचना – ‘हिन्दी का विवेचनात्मक गद्य’ तथा ‘यामा’ और दीपशिखा’ की भूमिकाएँ l

काव्य रचनाएँ – ‘रश्मि’, ‘यामा’, ‘दीपशिखा’, ‘नीरजा’, ‘निहार’, और ‘सांध्यगीत’ आदि l

भाषा शैली – महादेवी जी की काव्य भाषा अत्यंत उत्कृष्ट, समर्थ एवं सशक्त है l संस्कृतनिष्ठता इनकी भाषा की प्रमुख विशेषता है l इनकी रचनाओं में उर्दू और अंग्रेजी के प्रचलित शब्दों का प्रयोग भी हुआ है l मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग भी इनकी रचनाओं में हुआ है जिससे इनकी भाषा में लोक जीवन की जीवन्तता का समावेश हो गया है l लक्षणा एवं व्यंजना की प्रधानता इनकी भाषा की महत्वपूर्ण विशेषता है l इस प्रकार महादेवी जी की भाषा शुद्ध साहित्यिक भाषा है l इनकी रचनाओं में चित्रोत्मक वर्णनात्मक शैली, विवेचनात्मक शैली, व्यंग्यात्मक शैली, अलंकारिक शैली, सूक्ति शैली, उद्धरण शैली आदि दिखाई देते है l  


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जीवन परिचय - हरिवंश राय बच्चन 
जीवन परिचय - मैथली शरण गुप्त   


                                                        

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