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Tuesday, 18 December 2018

हरिवंश राय बच्चन / जीवन परिचय /मधुशाला /


हरिवंशराय बच्चन / जीवन परिचय 




जन्म स्थान – प्रयाग ( उत्तर प्रदेश )
जन्म एवं मृत्यु दिनांक – 27 नवम्बर, 1907 ई० - 18 जनवरी, 2003 ई०
पिता – प्रताप नारायण                               माता - तेजी देवी
भाषा – खड़ीबोली                                    शैली – भावात्मक गीत शैली 


जीवन परिचय – हरिवंशराय बच्चन का जन्म प्रयाग में मार्गशीर्ष कृष्ण 7, संवत् 1964 वि० ( 27 नवम्बर, 1907 ई० ) में हुआ l इन्होने काशी और प्रयाग में शिक्षा प्राप्त की l कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से इन्होने डॉक्टरेट की l कुछ समय ये प्रयाग विश्वविद्यालय में अध्यापक रहे और फिर दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में कार्य किया और वहीँ से अवकाश ग्रहण किया l
बच्चन उत्तर छायावादी काल के आस्थावादी कवि थे l इनकी कविताओं में मानवीय भावनाओं की सामान्य एवं स्वाभाविक अभिव्यक्ति हुई है l सरलता, संगीतात्मक, प्रवाह, और मार्मिकता इनके काव्य की विशेषता हैं और इसी से इन्हें इतनी अधिक लोकप्रियता प्राप्त हुई l 18 जनवरी, सन 2003 ई० में बच्चन जी का निधन हो गया l

साहित्यिक परिचय - पहली पत्नी के मृत्यु के बाद विषाद और निराशा ने इनके जीवन को घोर लिया l इनके स्वर हमको ‘निशा – निमंत्रण’ और ‘एकांत संगीत’ में सुनने को मिलता हैं l इसी समय से इनके ह्रदय की गंभीर वृत्तियों का विश्लेषण आरम्भ हुआ, किन्तु सतरंगिनी में फिर नीड़ का निर्मद किया गया और जीवन का प्याला एक बार फिर उल्लास और आनन्द के आसव से छलकने लगा l बच्चन वास्तव में व्यक्तिवादी कवि रहे हैं l ‘बंगाल का काल’ तथा इसी प्रकार की अन्य रचनाओं में इन्होने अपने जीवन के बाहर विस्तृत जनजीवन पर भी दृष्टि डालने का प्रयत्न किया l इन परवर्ती रचनाओं में कुछ नवीन विषय भी उठाए गए l इनमे कवि की विचारशीलता तथा चिंतन की प्रधानता रही l वास्तव में इनकी कविताओं में राष्ट्रिय उद्गारों, व्यवस्था में व्यक्ति की असहायता और बेबसी के चित्र दिखाई पड़ते हैं l

रचनाएँ – आरम्भ में बच्चन जी उमर खैयाम के जीवन दर्शन से बहुत प्रभावित रहे l इसी ने इनके जीवन को मस्ती से भर दिया l इनकी काव्य कृतियों में –‘मधुशाला’, ‘निशा निमंत्रण’, ‘प्रणय पत्रिका’, ‘मधुकलश’, ‘मिलन यामिनी’, ‘त्रिभंगिमा’. ‘आरती और अंगारे’, ‘एकांत संगीत’, ‘सतरंगिनी’, ‘बुद्ध का नाचघर’ और ‘जाल समेटा’ l मधुशाला, मधुबाला, हाला और प्याला को इन्होने प्रतीकों के रूप में स्वीकार किया l 

भाषा एवं शैली – परवर्ती रचनाओं में कवि की वह भावावेशपूर्ण तन्मयता नहीं है, जो उसकी आरंभिक रचनाओं में पाठकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करती रही l इन्होने सरस खड़ीबोली का प्रयोग किया है l शैली भावात्मक गीत शैली है, जिसमे लाक्षणिकता और संगीतात्मकता है l 

इन्हें भी जानें -
जीवन परिचय - हरिवंश राय बच्चन 

जीवन परिचय - मैथली शरण गुप्त 





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