गद्य, पद्य, व्याकरण, छन्द, रस, अलंकार, समास इत्यादि

Sunday, 9 December 2018

ब्रेन स्ट्रोक होने का पहचान एवं उपचार

ब्रेन स्ट्रोक होने का पहचान एवं उपचार


ब्रेन स्ट्रोक होने का पहचान एवं उपचार
https://www.hindisahitya.info

      स्ट्रोक या ब्रेन अटैक एक गंभीर समस्या है , विश्व में अब तक 8 करोड़ लोग स्ट्रोक से ग्रस्त हो चुके हैं l दुनिया में 5 करोड़ व्यक्ति स्ट्रोक के कारण दिव्यांगता से ग्रस्त हो जाते हैं l  लेकिन इससे निराश होने की आवश्यकता नही है l अगर स्ट्रोक के लिए कुछ सजकता बरती जाय , तो इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है l यही नहीं समय रहते इसका इलाज भी संभव है l

इन फलों को खाने के बाद रोग आपके आस – पास भी नहीं भटकेंगे...


 स्ट्रोक मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति में बाधा आने के कारण होता है l यह आम तौर पर तब होता है जब रक्त वाहिकाएँ ( ब्लड वेसेल्स ) फट जाती है या किसी थक्के के कारण अवरुद्ध हो जाती है l इससे मस्तिष्क को ऑक्सीजन एवं अन्य पोषक तत्वों की आपूर्ति में कमी आ जाती है , जिससे मस्तिष्क के टिश्यूज को नुकसान पहुँचता है l जब मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाएं मृत हो जाती हैं , तब शरीर के विभिन्न हिस्सों को नियंत्रित करने की उनकी कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचता है l बहरहाल , कुछ सजकताएं बरतकर स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है l


ऐसे करें स्ट्रोक की पहचान

बिना किसी ज्ञात कारण के अचानक सर में बहुत तेज दर्द होना l
चेहरे, हांथों या पैरों में अचानक सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना ( विशेष रूप से शरीर के एक    तरफ )
अचानक भ्रम होने लगना या बोलने में परशानी होना l
एक या दोनों आँखों से अचानक देखने में परेशानी होना l
चलने फिरने में अचानक परेशानी होने लगना l
चक्कर आना और शारीरिक संतुलन में दिक्कत होना l


स्ट्रोक के विभिन्न प्रकार एवं उनका उपचार

इस्कीमिक स्ट्रोक : यह स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क की धमनियां सकुंचित या उसमें कोई अवरुद्ध हो जाता है इस कारण मस्तिष्क में रक्त प्रवाह में गंभीर रूप से कमी आ जाती है l यह स्ट्रोक इस्कीमिक स्ट्रोक कहलाता है l
इलाज : इस्कीमिक स्ट्रोक का इलाज करने के लिए रोगी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए l रोगी के अस्पताल आने के एक घंटे के अन्दर उसे क्लॉट को दूर करने वाली दवाएं दी जानी चाहिए l


हेमोरेजिक स्ट्रोक : यह स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क की रक्त वाहिनियाँ रिसने लगती हैं या फट जाती हैं l हेमोरेजिक स्ट्रोक मस्तिष्क के एन्जुरिज्म के फटने या कमजोर रक्त वाहनियों के रिसने के कारण होता है l रक्त मस्तिष्क में या इसके चारो ओर फैल जाता है और मस्तिष्क में सूजन और दबाव पैदा करता है l यह स्ट्रोक मस्तिष्क की कोशिकाओं और टिश्यूज को हानि पहुंचता है l
इलाज : हेमोरेजिक स्ट्रोक को रोकने या मस्तिष्क में रक्त फैलाव को रोकने के लिए सर्जरी की जाती है l
इन्जुरिम क्या होता है ?

इन्जुरिम मस्तिष्क की एक खतरनाक बीमारी है , जिसमें रक्त की नली में गुब्बारे जैसी संरचना बन जाती है l इन्जुरिम का पता दिमाक में स्ट्रोक के बाद ही पता चलता है l यह एक गंभीर चिकत्सकीय स्थिति है l इनके फटने पर दिमाक में काफी क्षति हो सकती है और यह मृत्यु का कारण बन सकता है l
इन्जुरिम का उपचार : इस समस्या का इलाज मस्तिष्क में क्लिपिंग और क्वाईलिंग की प्रक्रियाओं से होता है l

क्लिपिंग : क्लिपिंग के अंतर्गत न्यूरो सर्जन के द्वारा पारंपरिक रूप से की जाने वाली ‘ओपन क्लिपिंग’ में स्कल या खोपड़ी को खोलकर इन्जुरिम में क्लिप लगा दिया जाता है , यह क्लिप इन्जुरिम में रक्त प्रवाह को रोकता है , जो इसे फटने से रोकता है l

क्वाइलिंग : इसके तहत एक कैथेटर के माध्यम से इन्जुरिम में प्लेटिनम क्वायल को खोपड़ी खोले बगैर रखा जाता है l

फ्लो डायवर्टर्स : यह इन्जुरिम के इलाज का उपलब्ध सबसे नवीनतम उपाय है l ऐसे डिवाइस स्टेंट के समान होते हैं , लेकिन इन्हें मजबूती से तैयार किया जाता है और इस तरह इनके मेस ( तार से बनी हुई एक जाली ) के छेद पारंपरिक स्टेंट की तुलना में अधिक छोटे होते हैं l इनकी संरचना इस प्रकार की होती है कि ये इन्जुरिम के गुब्बारे में रक्त प्रवाह को जाने नहीं देते l परिणाम स्वरूप इन्जुरिम स्वयं ख़त्म हो जाता है l


ऐसे करें स्ट्रोक से बचाव
अगर हाई ब्लडप्रेसर है, तो डॉक्टर से परामर्स लेकर उसे नियंत्रित रखें l ब्लड प्रेसर को नियंत्रित     करने के लिए नियमित रूप से दवाएं लें l
ह्रदय रोगों के कारण भी स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है l इस लिए जो लोग कोरोनरी आर्टरी या   अन्य ह्रदय रोगों से ग्रस्त हैं, उन्हें अपने डॉक्टर से परामर्स एवं नियमित दवाएं लेनी चाहिए l
मोटापे से मुक्त रहें l इसके लिए समुचित खान-पान और नियमित रूप से व्यायाम करें l
डॉक्टर से परामर्स लेकर डायबिटीज वाले व्यक्ति अपनी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें l
रक्त में कोलेस्ट्रोल का स्तर नियंत्रित रखें l इसके लिए डॉक्टर के परामर्स से एक निश्चित अंतराल कोलेस्ट्रोल से सम्बंधित जाँच करें l

इन फलों को खाने के बाद रोग आपके आस – पास भी नहीं भटकेंगे...

  

No comments: