गद्य, पद्य, व्याकरण, छन्द, रस, अलंकार, समास इत्यादि

Friday, 7 December 2018

समास के प्रकार,तत्पुरुष समास,द्विगु समास,समास,अव्ययीभाव समास,समास को पहचाने ट्रिक्स से,कर्मधारय समास,समास पहचानने की ट्रिक,द्वन्द समास,समास को कैसे पहचाने


समास याद रखने का सबसे आसान तरीका ,

                                                 

     समास

 


समास की परिभाषा ‘समास’ का शाब्दिक अर्थ होता है – ‘सक्षेप’ l जब दो अथवा दो से अधिक पदों के बीच की विभक्ति अथवा योजक पदों को हटाकर एक संक्षिप्त पद बनाया जाता है, तो उस संक्षिप्त पद को ‘समास’ कहते हैं l समास कर लेनें पर प्रायः पदों की विभक्तियों का लोप हो जाता है और समस्त पदों को एक पद बनाकर अंत में विभक्ति लगाई जाती है l

    समस्त – पदसमास के नियम से मिले हुए शब्द समूह को ‘समस्त – पद’ कहते हैं l उदाहरण के लिए राजपुरुष: समस्त पद है l

    विग्रहसमस्त पद में मिले हुए शब्दों को; समास होने से पहलेवाली मूल स्थिति में कर देने को ‘विग्रह’ कहते हैं l उदाहरण के लिए राजपुरुष: का विग्रह ‘राज्ञः पुरुष;’ है l

Note समास पदों के बीच (+) चिन्ह का उपयोग नहीं किया जाता 

समास के छ: प्रकार होते हैं –

1.       द्वन्द समास               2. तत्पुरुष समास            3. अव्ययीभाव समास

4. कर्मधारय समास               5. द्विगु समास             6. बहुब्रीह समास

                  

  
समास की परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं -
  
1. द्वंद्व समास    दो पदों के बीच और छिपता है जहाँ, वहां द्वंद्व है l
                   माता- पिता, भाई- बहन, हरि- हर की ज्यों रस छन्द है ll 

2. तत्पुरुष समास -   लुप्त कारक चिन्ह हो या पद पद द्वितीय प्रधान हो l 

3. अव्ययीभाव समास -प्रथम पद अव्यय जहाँ वहां अव्ययी भाव समास l
                   यथा शक्ति, प्रतिदिनं, आजीवनम उपहास ll

4. कर्मधारय समास दो पद विशेष्य विशेषणों का कर्मधारय है सदा l
                   लम्बोदर, नीलोत्पल, नीलकंठ, यथा ll

5. द्विगु समास -    दो संख्यां वाची पद सदा द्विगु समास कहलाय l
                   पञ्चामृत, दशानन, त्रिभुवन द्विगु कहलाय ll 

6. बहुब्रीह समास -   बहुब्रीह होता है वहां, जहाँ अन्य पद प्रधान हो l
                   दशमुख, धनन्जय, चन्द्रशेखर, नीलकंठ सूरज हो ll 




No comments: