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Sunday, 6 January 2019

मैथली शरण गुप्त / जीवन परिचय



मैथली शरण गुप्त / जीवन परिचय




जन्म स्थानचिरगाँव, जिला झाँसी ( उत्तर प्रदेश )        
जन्म एवं मृत्यु दिनांक – 1886 ई० – 1964 ई०
पिता – सेठ रामचरण गुप्त                               माता – काशीबाई गुप्त  
भाषा -  खड़ीबोली                                      शैली – प्रबंधात्मक, उपदेशात्मक 

जीवन परिचयराष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त का जन्म सन 1886 ई० में चिरगाँव जिला झाँसी में हुआ था l उनके पिता सेठ राम चरण गुप्त भगवान की भक्ति और आध्यात्मिकता में सबसे अधिक समय लेते थे, उनकी इस पितृ प्रकृति की भक्ति का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा था, उनके पिता कविता के क्षेत्र में अग्रणी थे l इन्होने कक्षा 9 तक ही विद्यालयीय शिक्षा प्राप्त की थी, किन्तु स्वाध्याय से अनेक भाषाओँ के साहित्य का ज्ञान प्राप्त किया l महावीरप्रसाद द्विवेदी के सम्पर्क में आने के बाद उनको अपना काव्य गुरु मानने लगे l द्विवेदी जी के आदेश पर गुप्तजी ने सर्वप्रथम ‘भारत भारती’ नामक ग्रन्थ की रचना की और युवाओं में देश प्रेम की सरिता बहा दी l इन्होने गाँधी जी के साथ स्वतंत्रता आन्दोलन में भी भाग लिया l राष्ट्रिय विषयों पर लिखने के कारण ये राष्ट्रीय कवि कहलाए l सन 1948 में आगरा विश्वविद्यालय और 1958 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने डी० लिट की मानक उपाधि से सम्मानित किया l सन 1954 में भारत सरकार ने पद्मभूषण की उपाधि से इन्हें अलंकृत किया l दो बार ये राज्यसभा के सदस्य भी मनोनीत हुए l इनका देहावसान 12 दिसम्बर, सन 1964 को हुआ l

साहित्यिक परिचय – गुप्तजी की प्रारम्भिक रचनाएँ कलकत्ता से प्रकाशित पत्रिका ‘वैश्योपकारक’ में प्रकाशित होती थीं l द्विवेदी जी के सम्पर्क में आने के बाद इनकी रचनाएँ ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित होने लगी l सन 1909 में इनकी सर्वप्रथम पुस्तक ‘रंग में भंग’ का प्रकाशन हुआ l इसके बाद सन 1912 में ‘भारत भारती’ के प्रकाशित होने से इन्हें अपार ख्याति मिली l ‘साकेत’ नामक महाकाव्य पर हिंदी साहित्य सम्मलेन ने इन्हें ‘मंगला प्रसाद पारितोषिक’ प्रदान किया l खड़ीबोली के स्वरुप निर्धारण और उसके विकास में इन्होने अपना अमूल्य योगदान दिया l


रचनाएँ – गुप्तजी आधुनिक काल के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि थे l इनकी 40 मौलिक तथा 6 अनूदित पुस्तके प्रकाशित हुई हैं l इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ इस प्रकार हैं – ‘भारत भारती’, ‘यशोधरा’, ‘साकेत’, ‘पंचवटी’ हैं l इसके अतिरिक्त ‘जयद्रथ वध’, ‘जय भारत’, ‘द्वापर’, ‘सिद्धराज’, ‘अनघ’, ‘झंकार’, ‘नहुष’, ‘पृथ्वीपुत्र’, ‘रंग में भंग’, ‘गुरुकुल’, ‘किसान’, ‘हिन्दू’, ‘चंद्रहास’, ‘मंगल घट’, ‘कुणाल गीत’, ‘तथा ‘मेघनाथ वध’ आदि महत्वपूर्ण रचनाएँ हैं l


भाषा एवं शैली – गुप्त जी ने शुद्ध, साहित्यिक एवं परिमार्जित खड़ीबोली में रचनाएँ की हैं l इनकी भाषा सुगठित तथा ओज एवं प्रसाद गुण से युक्त है l इन्होने अपने काव्य में संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू एवं प्रचलित विदेशी शब्दों के भी उपयोग किए हैं l इनके द्वारा प्रयुक्त शैलियाँ हैं – प्रबंधात्मक शैली, उपदेशात्मक शैली, विवरणात्मक शैली, गीति शैली तथा नाट्य शैली l वस्तुतः आधुनिक युग में प्रचलित अधिकांश शैलियों को गुप्त जी ने अपनाया है l  



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